देहरादून। उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया 6 मार्च से शुरू होगी और इसके लिए श्रद्धालुओं से कोई भी शुल्क नहीं लिया जाएगा। पंजीकरण पूरी तरह निशुल्क रहेगा, जिससे देश-विदेश से आने वाले यात्रियों को राहत मिलेगी। इस वर्ष केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को खोले जाएंगे, जबकि बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खुलेंगे। वहीं गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट परंपरागत रूप से अक्षय तृतीया के दिन खुलते हैं। इस वर्ष अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को है, हालांकि इन दोनों धामों के कपाट खुलने की औपचारिक घोषणा अभी शेष है। यात्रा को सुव्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित कर विभिन्न विभागों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। लोक निर्माण विभाग के सचिव ने चारधाम यात्रा मार्ग का स्थलीय निरीक्षण कर सड़क, पुल और अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति का जायजा लिया है, ताकि यात्रा के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो।
पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल ने जानकारी दी कि 6 मार्च से ऑनलाइन पंजीकरण पोर्टल सक्रिय कर दिया जाएगा। शुरुआत में केवल ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध रहेगी, जबकि यात्रा आरंभ होने के बाद ऑफलाइन पंजीकरण की व्यवस्था भी शुरू की जाएगी। गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने बताया कि पंजीकरण शुल्क का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, लेकिन इस पर सहमति नहीं बन पाई। इसलिए सरकार ने निर्णय लिया है कि इस वर्ष पंजीकरण पूरी तरह निशुल्क रखा जाएगा। चारधाम यात्रा हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र होती है। सरकार का लक्ष्य है कि पंजीकरण प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और सुगम बनाया जाए, ताकि यात्रियों की संख्या का सही आकलन कर व्यवस्थाएं बेहतर ढंग से की जा सकें। प्रशासन का कहना है कि इस बार सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, ट्रैफिक प्रबंधन और आपदा तैयारी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यात्रियों से अपील की गई है कि वे यात्रा पर आने से पहले अनिवार्य रूप से पंजीकरण कर लें और निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करें, ताकि चारधाम यात्रा सुरक्षित और सफल हो सके।