Oct 03, 2026

उत्तराखंड के सरकारी दफ्तरों में हाई-टेक सुरक्षा घेरा: पैनिक बटन, सीसीटीवी और विजिटर ट्रैकिंग से लैस होंगे कार्यालय

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देहरादून। उत्तराखंड के सरकारी दफ्तरों में अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर शासन ने अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। आए दिन टेंडर, विभागीय आपत्तियों और ठेकेदारों की आवाजाही को लेकर बनने वाले तनावपूर्ण माहौल से निपटने के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया  लागू कर दी गई है। इसके तहत प्रमुख अधिकारियों के कक्षों में आपातकालीन स्थिति के लिए पैनिक बटन लगाए जाएंगे, जबकि पूरे परिसर पर 90 दिनों की रिकॉर्डिंग क्षमता वाले हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरों से पैनी नजर रखी जाएगी।

प्रदेश के सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था अब पहले से अधिक सख्त और तकनीक आधारित होगी। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के सभी कार्यालयों में नई मानक संचालन प्रक्रिया  लागू करने की मंजूरी दे दी गई है। इसके तहत प्रमुख अधिकारियों के कक्ष में पैनिक बटन लगाया जाएगा, जबकि कार्यालय परिसर में हाई डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य होंगे। कैमरों में कम से कम 90 दिन की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने की व्यवस्था करनी होगी।  नई सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही बाहरी लोगों के प्रवेश को नियंत्रित करना और किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करना है। इसके तहत कार्यालय के प्रवेश द्वार से लेकर अधिकारियों के कक्ष और पूरे परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को निर्धारित नियमों के दायरे में लाया जाएगा। नई एसओपी के तहत प्रत्येक कार्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर आगंतुक पंजिका या इलेक्ट्रॉनिक विजिटर मैनेजमेंट सिस्टम की व्यवस्था करनी होगी। बिना वैध पहचान पत्र किसी बाहरी व्यक्ति को कार्यालय में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। कार्यालय में आने वाले प्रत्येक आगंतुक का नाम, पता या मोबाइल नंबर, आने-जाने का समय और किस अधिकारी से मिलने आया है, इसका रिकॉर्ड दर्ज करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा किसी अधिकारी के कक्ष में एक समय में दो से अधिक आगंतुकों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इससे अधिकारियों से मिलने के लिए एक साथ बड़ी संख्या में पहुंचने वाले लोगों की आवाजाही को नियंत्रित किया जा सकेगा। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कार्यालय परिसर में एचडी सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इनमें कम से कम 90 दिनों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने की क्षमता होगी। प्रवेश द्वार पर डीएफएमडी यानी डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर भी लगाया जाएगा। इसका उद्देश्य हथियार अथवा प्रतिबंधित धातु की वस्तुओं को कार्यालय परिसर के भीतर ले जाने से रोकना है। कार्यालय में हथियार, ज्वलनशील पदार्थ, लाठी-डंडे, स्याही और अन्य आपत्तिजनक वस्तुएं ले जाने पर प्रतिबंध रहेगा। मादक पदार्थों पर भी पूरी तरह रोक रहेगी। कार्यालय समय समाप्त होने के बाद परिसर में अनधिकृत प्रवेश भी प्रतिबंधित होगा। नई एसओपी में सरकारी कामकाज में बाधा डालने, शोर-शराबा करने, नारेबाजी अथवा अमर्यादित व्यवहार करने पर रोक लगाई गई है। ऐसी स्थिति में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई और जरूरत पड़ने पर सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज की जा सकेगी। इसके लिए कार्यालयों के बाहर प्रमुखता से सूचना पट्ट लगाए जाएंगे। आगंतुकों को यह भी बताया जाएगा कि पूरा परिसर सीसीटीवी की निगरानी में है। नई व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान प्रमुख अधिकारियों के कक्ष में पैनिक बटन लगाने का है। किसी आपात स्थिति या सुरक्षा संबंधी खतरे की स्थिति में अधिकारी पैनिक बटन दबाकर तत्काल मदद का संकेत दे सकेंगे। इससे सुरक्षा व्यवस्था केवल निगरानी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि घटना के समय त्वरित प्रतिक्रिया की व्यवस्था भी सुनिश्चित होगी। सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए प्रत्येक कार्यालय में एक नोडल अधिकारी नामित किया जाएगा। कार्यालय परिसर में सुरक्षा संबंधी कोई घटना होने पर इसकी सूचना तत्काल नोडल अधिकारी को देनी होगी। घटना का पूरा विवरण अलग से घटना पंजिका में दर्ज किया जाएगा। लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पांडे की ओर से जारी आदेश में गृह विभाग के 25 फरवरी 2026 के पत्र में निर्धारित एसओपी को विभाग के सभी कार्यालयों में लागू करने की स्वीकृति दी गई है। पीडब्ल्यूडी कार्यालयों में ठेकेदारों, निर्माण एजेंसियों और आम लोगों का नियमित आवागमन होता है। टेंडर और निर्माण कार्यों से जुड़े मामलों में आपत्तियों और विरोध की स्थिति को देखते हुए कार्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद पहचान, प्रवेश, निगरानी और आपात प्रतिक्रिया चारों स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को निर्धारित प्रक्रिया के तहत संचालित किया जाएगा।